Kinnar Laila Baee Kee Jhaadoo Ka Chamatkaar | Baageshvar Bhaam Jaisa | Balaji Mandir

 

किन्नर लैला बाई की झाड़ू का चमत्कार बागेश्वर धाम जैसा


भक्तों हिंदू धर्म की मान्यताओं और मत्स्य पुराण के अनुसार झाड़ू को श्री माता लक्ष्मी जी का प्रतीक माना जाता है।
और बृहद संहिता में झाड़ू को सुख संपत्ति बढ़ाने और घर से दरिद्रता हटाने वाली वास्तु माना गया है।

लेकिन भक्तों इस आर्टिकल के मध्य से आपको बताने जा रहे हैं, 

एक ऐसा चमत्कारी हनुमान मंदिर जहां झाड़ू से झाड़ू लगाया जाता है। और तीन दिन के झाड़ा लगाने से सभी तरह के बिमारी वो कष्टो को दूर किया जाता है। 
तो चलिए भक्तों इस मंदिर के बाड़े में हम इस आर्टिकल के मध्य से विस्तार से जान लेते हैं।


मंदिर तक कैसे पहुँचें

भक्तों भारत में श्री राम भक्त हनुमान जी के कई चमत्कारिक मंदिर है। 
जहां हनुमान जी विभिन्न रूपन में विराजमान है। 
लेकिन भक्तों राजस्थान के जयपुर जिले से 25 किलोमीटर और निंदर बैनर रेलवे स्टेशन से करीब 9 किलोमीटर की दूरी पर खोरा बिसल होते हुए जयरामपूरा रोड पर दत्तावता मोर के पास एक ऐसा चमत्कारी हनुमान मंदिर है।
जहां झाड़ू से झाड़ा लगाने वाला हनुमान मंदिर के नाम से काफी प्रसिद्ध है। 

मंदिर का निर्माण

भक्तों आपको यह भी बता दें की इस मंदिर का निर्माण करने वाली कीन्नर के गुरु माता गुरु श्री बाई वो रेखा उर्फ लैला बाई ने 9/12/2021 को इस मंदिर का निर्माण करवाया है।
वह भी भक्तों बिना किसी के चंदा लिए बिना किसी के मदद के, केवल गुरु श्री बाई की जमा पूंजी से यह मंदिर का निर्माण किया गया। इसीलिए भक्तों गुरु श्री बाई चमत्कारिक हनुमान मंदिर तथा लैलाबाई चमत्कारिक हनुमान मंदिर के नाम से भी इस मंदिर को जाना जाता है। 


मंदिर में उपचार के नियम

भक्तों यहां किन्नर लैला बाई झाड़ू से झाड़ा लगाती है, और गंभीर से गंभीर बिमारियों का दवाई भी फ्री देती है। श्रद्धालुओं को तीन दिन झड़ा लगाना पड़ता है। तीन झाड़ा लगते ही हर तरह के बिमारी वो दुख: दर्द दूर हो जाते हैं। 
यानी भक्तों किसी भी बीमारी को ठीक करने के लिए इस मंदिर में आपको तीन रविवार झाड़ा लगवाने आना ही पड़ेगा। 


झाड़ा लगने का समय सीमा

भक्तों आपको यह भी बता दे की यहां हर रविवार को लाखों दुखी श्रद्धालुओं की भिड़ उमरती है। 
क्योंकि केवल रविवार को ही किन्नर लैला दीदी सुबह 11:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक झाड़ा लगती है।
भक्तों आपको यह भी बता दे की शाम की आरती के बाद झाड़ा नहीं लगाया जाते। 
भक्तों कभी-कभी भीड़ इतनी हो जाति है की श्री लैला बाई को लाइन में खड़े श्रद्धालुओं को लाइन में ही झाड़ा लगाना पड़ता है। 
भक्तों लैला दीदी मंगलवार को भी एक दो घंटे झाड़ा लगती है। 
मंगलवार को झाड़ा लगाने का कोई समय सीमा निश्चित नहीं की गई है। 

शनिवार सुबह से ही भीड़

भीड़ को देखते हुए श्रद्धालु गण शनिवार को ही देर रात आकर अपनी जगह यानी लाइन चिन्हित करते हैं। भक्तों इतना ही नहीं शनिवार सुबह से ही दुकानदार जैसे की? नारियल,अगरबत्ती,फूल,माला, मिठाई या चाय नाश्ता इत्यादि की अपनी अपनी दुकान लगानी शुरू कर देते हैं। भक्तों शायद यह देश का पहला ऐसा मंदिर है जहां हनुमान मंदिर में हनुमान जी की कृपा से किन्नर द्वारा झाड़ू से झाड़ा लगाया जाता है, और सभी भक्तों को सभी तरह के कष्ट से छुटकारा मिलता है। 
भक्तों इस मंदिर में कौन-कौन सी बिमारी का इलाज होता है हम अगले आर्टिकल में बताएंगे जब तक इस वेबसाइट को फ्लो करके रखें। 


झाड़ू और हनुमानजी के कृपा 

भक्तों आपको आर्टिकल के लास्ट में यह भी बता दें की घर की साफ सफाई करने के साथ-साथ ऐसा माना जाता है की,घर में प्रतिदिन समय पर झाड़ू लगाने से घर में सुख समृद्धि का वास होता है,
और घर में सभी प्रकार के कष्ट और नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाति है। 
तो भक्तों किसी भी दुखों को दूर करने के लिए झाड़ू से झाड़ू क्यों नहीं लगाई जा सकती वो भी हनुमान जी के कृपा के साथ 
🚩इसी के साथ भक्तों हनुमान जी आप सभी भक्तों को सभी तरह के कष्टो से दूर रखें
🙏 Vinod Gupta 


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(नोट-इस चैनल पर दिखाई गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं। Dharmasthala Yatra Gyan इनकी पुष्टि नहीं करता है।)

Mehandipur Balaji Ki Kahani Part-1 | How Was Mehndipur Balaji Established Part 1

 

मेहंदीपुर बालाजी की कहानी भाग -1 | Mehandipur Balaji Ki Kahani Part 1

भक्तों राजस्थान के श्री मेहंदीपुर बालाजी धाम में भूत प्रेत और ऊपरी बधाओ से ग्रसित व्यक्ति श्री बालाजी एवं प्रेतराज सरकार और श्री कप्तान भैरव के कृपा से ठीक हो जाते हैं।

तो भक्तों क्या आप इस मंदिर निर्माण और श्री बालाजी प्रेतराज सरकार और कप्तान भैरव यहां पर विराजमान कैसे हुए यह जानना चाहते हैं तो इस  आर्टिकल में बने रहने के साथ-साथ इस कहानी के सभी भाग को पढ़ना ना भूलें।

तो आईये भक्तों श्री बालाजी के जयकारा बोलते हुए इस कहानी को हम पढ़कर  जान लेते है।




Story Of Mehandipur Balaji In Hindi


भक्तों श्री मेहंदीपुर बालाजी मंदिर का इतिहास के बात करें तो करीब 1000 साल से पहले यहां पर घोर घंना जंगल हुआ करता था।

चारो तरफ फैली हुई घनी झाड़ियों में जंगली जानवरों का बसेरा हुआ करता था।

भक्तों एक दिन की बात है एक दिन श्री मंहत जी महाराज के पूर्वज गोसाईजी को सपना आया और सपने की अवस्था में ही वे उठ कर चल दिए।

उन्हें पता नहीं था कि वे कहाँ जा रहे है? चलते चलते भक्तों वे घने जंगल से घिरे पहाडिंयो के बिच पहुचं गये।

और भक्तों इसी दौरान उन्होंने एक बेहद विचित्र लीला देखी की एक ओर से हजारों दीपक जलते और चलते आ रहे थे।

हाथी घोड़े की तेज आवाज के साथ एक बहुत बड़ी फौज चली आ रही थी।

भक्तों उस फौज ने पहाड़ की घाटी पर रुक कर वहा विराजमान श्री बालाजी महाराज की मूर्ति के चारो ओर तीन बार घुमकर प्रनाम कीया।

और फौज के प्रधान ने नीचे उतरकर श्री बालाजी महाराज को दण्डवत प्रणाम किया।

तथा जिस रास्ते से वे आए थे उसी रास्ते से चले गए।

भक्तों गोसाई जी महाराज चकित होकर यह सब देखते ही रह गए।

उन्हें कुछ डर सा लगा और वे वहा से भागते हुये अपने घर को आ गए।

और गोसाइजी महाराज अपने विस्तर पर सोने की कोशीस करने लगे।

किन्तु उन्हें नींद नहीं आ रही थी कीयोकी उनके मन में बार-बार वही चित्र सामने आ रहे थे।

तो भक्तो इसी विषय पर विचार करते हुए गोसाईजी के जैसे ही आँखें लगी उन्हें सपने में तीन मूर्तिया दिखाइ दी। और उनके कानों में यह आवाजे आई “उठो, मेरी सेवा का भार ग्रहण करो मैं अपनी लीलाओं का विस्तार करूंगा“ यह बात कौन कह रहा था ये कोई दिखाई नहीं पड़ा।

भक्तों गोसाई जी को यह बात समझ में नही आइ की अजीब सा सपना मुझे क्यो दिखाई दिया।

भक्तों गोसाई जी ने सपना समझ कर इन बातों पर ध्यान नहीं दिया।




Mehandipur Balaji Kaise prakat hue the | मेहंदीपुर बालाजी कैसे प्रकट हुए थे

Mehandipur Balaji Ki Kahani Part - 2 | How Was Mehndipur Balaji Established Part 2


मेहंदीपुर बालाजी की कहानी भाग 2 | Mehandipur Balaji Ki Kahani Part 2


भक्तों श्री मेहंदीपुर बालाजी के कहानी के भाग एक में आपने अब तक पढा़। कि गोसाई जी को सपना आया सपने के अनुसार गोसाई जी बालाजी के प्रतिमा तक पहुंचे। और भक्तों  आसपास के लोगों को इकट्ठा किया और लोगों की मदद से श्री बालाजी की छोटी सी तिवारी बनाकर श्री गुसाईं जी पूजा-अर्चना करने लगे। भक्तों इस कहानी के भाग दो पढ़ने से पहले इस website पर आप नये है तो follow कर लीजिए।



Story Of Mehandipur Balaji In Hindi

भक्तों श्री मेहंदीपुर बालाजी के स्थापना के बाद श्री गोसाईजी अस्थाई रूप से पूजा अर्चना करने लगे।

लेकिन कुछ दिनों के बाद कुछ कपटी और दुष्ट लोगों ने इसे ढोंग माना। 

तो बालाजी महाराज की प्रतिमा उन कपटी लोगो के सामने ही जहाँ से निकाली थी वह मूर्ति  फिर से वहीं लुप्त हो गई।

फिर लोगों ने श्री बाला जी महाराज से क्षमा मांगी तो वो मूर्तियाँ दिखाई 

देने लगी। 

यह देख सभी लोगों ने बालाजी की शक्ति को माना और गोसाई जी पर विश्वास किया। 

भक्तों आपको यह भी बता दे की--

गोसाई जी जंगली जानवरों को मंदिर से दूर रखने के लिए एक पेड़ के टहनी के सहारे घंटा लटका दि और समय समय पर बजाया करते थे।

इसीलिए गोसाईजी को कुछ लोग घंटे वाले बाबा जी के नाम से भी बुलाने लगे थे। 



Mehandipur Balaji Ka Chamatkar 

 मेहंदीपुर बालाजी का चमत्कार

भक्तों उस समय किसी राजपुत राजा का राज्य चल रहा था। 

गोसाई जी ने राजा को अपने सपने और बालाजी के बारे में बताने का निश्चय किया। 

गोसाई जी राजा को अपने सपने की बात बताई। राजा को यकीन नही हुआ 

और राजा बालाजी के चबूतरे पर पहुंचे और राजा ने मूर्ति को देखकर कहा ये कोई कला है। 

राजा के यह बात बोलते ही बालाजी की मूर्ति जमीन के अन्दर चली गयी। तो राजा ने खुदाई करवायी तब भी मूर्ति का कोई पता नही चला।

तब राजा ने हार मानकर बाबा से क्षमा मांगी और कहा 

हे श्री बाला जी महाराज हम मूर्ख हैं हम आपकी शक्ति को नही पहचान पाये हमें अज्ञानी समझ कर क्षमा कर 

दिजीये। राजा के क्षमा मांगते ही बालाजी महाराज की मूर्तियाँ बाहर आई।

Mehandipur Balaji Ka Jal | मेहंदीपुर बालाजी का जल

मूर्तियाँ बाहर आने के बाद राजा ने श्री बालाजी के चरन कमलों को अपने हाथ से पकड़ लिया। 

राजा ने देखा की मुर्ती पानी से गीली है। 

जैसे ही वह पानी राजा के हाथ मे लगी राजा के शरीर की सारे कष्ट दुर हो गये। 

भक्तों जब राजा ने गोसाई जी महाराज की बातों पर यकीन किया,और महंत गोसाई जी से बोले-

की हें गोसाई जी महाराज मेरे वजह से श्री बालाजी के चबूतरे को तोड़ा गया इसीलिए श्री बालाजी क मंदिर बनवाने वचन देता हूं और आपको बालाजी की पूजा का भार ग्रहण करने की आज्ञा देता हु। 

यह कहते हुए राजा वहा से चले गए। महंत गोसाई जी ने श्री बालाजी के मूर्ति को चारों तरफ से देखा की आखिर पानी का रिझाओ कहां से आ रहा है। 

श्री बालाजी महाराज के ह्रदय के पास एक छेद से एक बारिक जलधारा लगातार बहती जा रही थी 

गोसाई जी ने जलधारा को रोकने की बहुत कोशिश की मगर जलधारा नहीं रुका। 

तो गोसाई जी श्री बालाजी का चमत्कार समझ कर उसे बहने दिया।

(भक्तों आज उसी जलधारा के छिटें भक्तजनों को लगाया जाता है) 

इसके आगे की कहानी Mehandipur Balaji Mandir Nirman की कहानी हम इस पोस्ट के भाग-3 में बताये है। उस पोस्ट को पढे़✔️ Vinod Gupta

🚩तो प्रेम से बोलें और कमेंट में लिखे जय श्री बालाजी महाराज🙏

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(श्री बालाजी महाराज आप सभी के दुखों को दूर करें) 🙏🙏🙏🙏🙏

(नोट-Disclaimer: इस चैनल पर दिखाई गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Dharmasthala Yatra Gyan इनकी पुष्टि नहीं करता है।)